भक्त और भगवान के बीच ‘‘दिव्य सेतु’’ हैं ‘पूर्ण सदगुरूदेव’ -साध्वी विदुषी सुभाषा भारती जी

देहरादून। ईश्वर सर्वत्र हैं, जड़-चेतन सब में समाए हुए हैं लेकिन दिखते कब हैं? जब मनुष्य…