देहरादून | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन इन्स्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी राम को श्रेष्ठ मानवतावादी, दार्शनिक, शिक्षक एवं योगी बताते हुए पहाड़ में खास तौर पर चिकित्सा और रोजगार के क्षेत्र में उनके योगदान को बेमिसाल करार दिया।
उन्होंने जौली ग्रांट में विवि के चिकित्सा शिक्षा पर 13वें राष्ट्रीय सेमीनार में कहा कि स्वास्थ्य देखभाल और आजीविका कौशल प्रदान करके इस पहाड़ी राज्य में अवसरों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से स्वामीराम ने हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है. चिकित्सा के क्षेत्र में सुधार के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
पुष्कर ने कहा कि राज्य में निःशुल्क जांच योजना प्रारम्भ की है। मरीजों को 207 प्रकार की पैथोलॉजिकल जांचों की निःशुल्क सुविधा दी जा रही है। प्रत्येक जिले में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए हैं। 42 लाख 90 हजार से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। लाभार्थियों के उपचार पर अब तक 1020 करोड़ खर्च किइ जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि योग्यता आधारित चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का सपना रहा है। आगे बढ़ने के लिए छात्रों को सही ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण से सज्जित करना होगा। यह आज के समय की मांग भी है। कोविड महामारी ने सिखाया है कि हम सभी को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। हमारे मेडिकल कॉलेज को नियमित शिक्षण के साथ-साथ ई-शिक्षण के लिए तैयार रहना चाहिए. ई-मॉड्यूल और टेलीमेडिसिन से सुसज्जित रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल छात्र ही भविष्य के भारत में उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं का निर्धारण करेंगे। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर हमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों को चिकित्सा शिक्षा, ई-लर्निंग और सिमुलेशन लैब के लिए मजबूत मॉड्यूल विकसित करने के लिए आपस में सहयोग और समन्वय से कार्य करना होगा।
इस अवसर पर नीति आयोग दिल्ली के सदस्य डॉ. विनोद कुमार पॉल, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय धस्माना , प्रतिकुलपति डॉ. विजेन्द्र चौहान, हिमालयन आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक देवराड़ी, एसोसिएशन ऑफ हेल्थ प्रोफेशनल एजुकेशन की अध्यक्ष डॉ. अंशु मौजूद थीं।