राष्ट्रीय राजधानी में कॉर्पोरेट नैतिकता और कार्यस्थल सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गया है। दिल्ली की एक प्रमुख डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के खिलाफ 20 वर्षीय महिला इंटर्न के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। 3 मई को साकेत पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले ने छह महीने तक चले शोषण के भयावह सिलसिले को उजागर किया है।
पीड़िता, जो एक विश्वविद्यालय की छात्रा है और नवंबर 2025 में प्लेसमेंट कार्यक्रम के माध्यम से कंपनी से जुड़ी थी, ने आरोप लगाया है कि आरोपी CEO ने न केवल उसका शारीरिक और मानसिक शोषण किया, बल्कि विरोध करने पर उसका करियर बर्बाद करने की धमकी भी दी।
शोषण का सिलसिला: नवंबर से अप्रैल तक की दास्तां
प्राथमिकी के अनुसार, उत्पीड़न तब शुरू हुआ जब पीड़िता ने सोशल मीडिया इंटर्न के रूप में काम करना शुरू किया। शिकायत में कहा गया है कि शुरुआत में CEO ने पेशेवर व्यवहार का नाटक किया, लेकिन जल्द ही उनकी हरकतें अभद्र होने लगीं।
पीड़िता द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
- असमय कॉल और अभद्र टिप्पणियां: आरोपी पीड़िता को रात के समय फोन करता था और काम की आड़ में उसके रूप-रंग और निजी जीवन पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करता था।
- शारीरिक दुर्व्यवहार: FIR में दर्ज विवरण के अनुसार, आरोपी ने कई बार पीड़िता को गलत तरीके से छूने का प्रयास किया। एक घटना का जिक्र करते हुए पीड़िता ने बताया कि CEO ने केबिन में उसका हाथ पकड़कर चूम लिया।
- सहानुभूति की आड़ में शोषण: जब पीड़िता ने अपनी किसी व्यक्तिगत समस्या के बारे में बात की, तो आरोपी ने उसे जबरन गले लगाया और बिना सहमति के चुंबन किया।
“कॉर्पोरेट दिल्ली कल्चर” – एक शर्मनाक बचाव
7 मार्च 2026 को पीड़िता ने साहस जुटाकर WhatsApp पर CEO को उसके व्यवहार के लिए टोका। इसके बाद 9 मार्च को हुई एक बैठक में आरोपी ने माफी तो मांगी, लेकिन उसने अपने व्यवहार को “कॉर्पोरेट दिल्ली कल्चर” (Corporate Delhi Culture) करार देते हुए इसे सामान्य बताने की कोशिश की।
कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस दलील की कड़ी निंदा की है। POSH कानून की विशेषज्ञ वकील मीनाक्षी सिंह का कहना है, “शक्तिशाली पदों पर बैठे लोग अक्सर अपने अपराध को ‘संस्कृति’ का नाम देकर खुद को बचाने की कोशिश करते हैं। किसी भी कार्यस्थल की संस्कृति गैर-सहमति वाले शारीरिक स्पर्श की अनुमति नहीं देती।”
प्रतिकार और प्रणालीगत विफलता
अप्रैल में जब पीड़िता ने मानवाधिकार (HR) विभाग से शिकायत की और इंटर्नशिप छोड़ने की इच्छा जताई, तो कंपनी ने उसकी मदद करने के बजाय उसे ही 15 अप्रैल को नौकरी से निकाल दिया। पीड़िता को उसका ‘इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट’ भी नहीं दिया गया, जो उसके शैक्षणिक भविष्य के लिए अनिवार्य है।
आरोपी ने उसे धमकाते हुए कहा, “अगर तुमने यह बात किसी को बताई, तो मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि तुम्हारा करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाए।”
पुलिस कार्रवाई और कानूनी धाराएं
दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
- धारा 74: महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
- धारा 75: यौन उत्पीड़न।
- धारा 78: पीछा करना (बार-बार फोन करना और निगरानी रखना)।
- धारा 351: आपराधिक धमकी।
जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया: “हम इस मामले की बहुत संवेदनशीलता से जांच कर रहे हैं। हमने डिजिटल सबूत और WhatsApp चैट एकत्र किए हैं। पीड़िता का बयान दर्ज किया जा रहा है और हम कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।”
कार्यस्थल पर सुरक्षा की चुनौती
2013 के POSH अधिनियम के बावजूद, भारत में कई स्टार्टअप और मध्यम स्तर की कंपनियों में आज भी आंतरिक शिकायत समितियां (ICC) कागजों तक ही सीमित हैं। आंकड़े बताते हैं कि कॉर्पोरेट क्षेत्र में लगभग 30% महिलाएं किसी न किसी रूप में उत्पीड़न का सामना करती हैं, लेकिन करियर बर्बाद होने के डर से बहुत कम मामले सामने आते हैं। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि कार्यस्थल को सुरक्षित बनाने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिकता में बदलाव और सख्त जवाबदेही की आवश्यकता है।