ईश्वर के बिना ‘जीवन’,जैसे ‘नमक’ बिना ‘व्यंजन’ -साध्वी विदुषी भक्ति प्रभा भारती जी

देहरादून। संसार अकालग्रस्त है। अकाल सिर्फ अन्न का, भोजन का ही मात्र नही हुआ करता अपितु…